प्रोग्रामिंग भाषा सी का परिचय Introduction of C language

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इस पोस्ट मे प्रोग्रामिंग भाषा C का परिचय और History of C language, advantage and disadvantage of C language (सी भाषा की विशेषतायें) तथा Basic structure of c language in Hindi, सी प्रोग्राम को कितने भागो मे बाँटा गया है, C को Middle Level Programming Language क्यो कहा जाता है, सी भाषा को किसने बनाया था तथा इसे किस सन् मे बनाया गया था आदि के विषय मे भी बताया गया है।
प्रोग्रामिंग भाषा सी का परिचय Introduction of C language

Introduction of c language in Hindi

कंप्यूटर Machine Language समझते हैं जो कि  0 व 1 के द्वारा लिखी जाती है, इसलिए कंप्यूटर को निर्देश देने या प्रोग्राम बनाने के लिए 0 व 1 का प्रयोग किया जाता है। परंतु हमारे लिए इसे समझना व इस भाषा में प्रोग्राम लिखना कठिन होता है, इसलिए हम उच्च स्तरीय भाषाओं जैसे Fortran, Pascal, Java आदि का प्रयोग करते हैं, परंतु एक जैसे कार्य को करने के लिए मशीनी भाषा की तुलना में उच्च स्तरीय भाषाएं (High Level Language) अधिक समय लेती है इसलिए दोनों ही स्तर की भाषाओं की हानियों से उबरने के लिए C Language का प्रयोग किया जाता है। सी भाषा उच्च स्तरीय व निम्न स्तरीय दोनों भाषाओं की विशेषता को रखती है इसलिए Programming Language C को Middle Level Programming Language भी कहा जाता है


सी भाषा का इतिहास History of C Language

C एक General Purpose Computer Programming Language है, जो 1972 और 1973 के बीच Bell Telephone Laboratories, में Dennis MacAlistair Ritchie द्वारा Unix operating system मे उपयोग के लिए विकसित की गई थी।  इस लैंग्वेज का नाम C Language इसलिए पड़ा क्योंकि, इसकी कई विशेषताएं B Language नामक एक पूर्व की भाषा से ली गई थी ।
B Language को 1969-70 में Ken Thompson द्वारा विकसित (Developed) किया गया था। शुरुआती दिनों में कंप्यूटर Code असेंबली भाषा में लिखे जाते थे, इसमें किसी विशिष्ट कार्य (Specific work) को करने के लिए Code के कई Page लिखने पड़ते थे। परंतु ‘B’ जैसी High level language ने उसी कार्य (same task) को कोड की कुछ लाइन मे ही लिखना संभव बना दिया। उच्च  स्तर की भाषा B के कारण program code को असेंबली लैंग्वेज के मुकाबले बहुत तेजी से उत्पादित (Produce) किया जा सकता था, और आगे चलकर बी भाषा का उपयोग Unix प्रणाली के विकास के लिए भी किया गया। किंतु बी लैंग्वेज का एक दोष यह था कि यह Data Type को नहीं जानती थी और एक कार्यक्षमता और, जो बी भाषा प्रदान नहीं करती थी वह था “संरचनाओं” का उपयोग।
 बी भाषा की इन्हीं शिथिलता (Lag) ने Dennis M. Ritchie के लिए प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सी को विकसित करने का कारण बना दिया। Dennis M. Ritchie ने पुरानी भाषायें जैसे- ALGOL, BCPL तथा B को लेकर उसमें डाटा टाइप जोड़ते हुए और अन्य  कई परिवर्तन करते हुए सी लैंग्वेज में बदल दिया। उसके बाद बड़ी संख्या में कई शोधकर्ताओं ने भी C के विकास में योगदान दिया है, उदाहरण के लिए Lesk ने एक Portable Input Output Package लिखा था जिसे बाद में standard I / O routines बनाने के लिए संशोधित किया गया था । 1990 तक C standard ISO / IEC 9899-1990, प्रोग्रामिंग भाषा बन गई। हालांकि 1999 में फिर से यह महसूस किया गया कि अभी सी को एक और संशोधन की आवश्यकता है, और इसी के साथ सी भाषा में नए Keywords और Header files शामिल की गई, और उसके बाद भी इसमें कई संशोधन किए गए परंतु इसकी मूल संरचना वही रही जिसे Dennis Ritchie ने बनाया था और वर्तमान में भी सी लैंग्वेज कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी 90 के दशक में थी। आज प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सी सबसे लोकप्रिय भाषाओं में से एक है। 

यह भी जाने- History of Programming Language

C भाषा के प्रोग्राम का स्ट्रक्चर - Basic Structure of c program 

C Program के मुख्य रूप से निम्नलिखित भाग होते हैं-
  1. Preprocessor Commands
  2. Main Functions
  3. Variables
  4. Statements & Expressions
  5. Comments
निम्नलिखित उदाहरण में सी भाषा में प्रोग्राम के स्ट्रक्चर को दर्शाया गया है-


Basic Structure of c program
जहाँ-
  • Program की पहली लाइन  #include<stdio.h> और दूसरी लाइन #include<conio.h>  एक Preprocessor Command है, जो actual compilation पर जाने से पहले stdio.h और conio.h को सम्मिलित करने के लिए C compiler को बताता है। इन्हे header file भी कहते है। इन header file के अंदर Predefine function होते है जिन्हें सी प्रोग्राम में सीधे तौर पर प्रयोग  किया जाता है। 
  • इसके बाद main function का स्ट्रक्चर शुरू होता है, सी प्रोग्राम में यह महत्वपूर्ण भाग होता है क्योंकि C का compiler main function से ही प्रोग्राम को Compile करना प्रारंभ करता है ।
  • फिर Opening Curly braces ( { ) लगाया जाता है, जिससे पता चलता है की अब यहाँ से main function शुरू होता है।
  • उसते बाद वे सभी Variables Declare किए जाते हैं जिन्हें main function के अंदर प्रयोग किया जाना है। यह Variables, Local Variables होते है।
  • फिर Program के  Statements, Expressions और Logic लिखे जाते है,जैसे a=15, printf(“%d”,a); आदि।
  •  उसके बाद getch() Function लिखा जाता है, जो Command की Screen को Hold करके रखता है। यदि इसे न लिखा जाऐ तो Program execute होने के बाद command window automatic close हो जाएगी।
  • अन्त मे Closing Curly braces ( } ) लगाया जाता है, जिससे पता चलता है की अब यहाँ main function बंद होता है।
  • Program मे  /*——-*/ का प्रयोग करके टिप्पणी (Comment) भी लिख सकते है, जिन्हे compiler, compile और execute नही करता। यह केवल Programmer के लिए होती है, ताकि Program को ठीक से समझा जा सके।

सी भाषा की विशेषतायें Advantage of C language

  1. सी भाषा में लिखे गए program Portable होते हैं, अर्थात एक प्रकार के कंप्यूटर या ऑपरेटिंग सिस्टम में लिखे गए प्रोग्राम को दूसरे प्रकार के कंप्यूटर या ऑपरेटिंग सिस्टम पर बड़ी आसानी से Run किया जा सकता है। 
  2. यह Middle Level Language है, जिसका अर्थ है कि यह High level programming के साथ-साथ Low level Programming को भी Support करती है।  
  3. सी लैंग्वेज में 32 प्रकार के Keywords होते हैं ।
  4. यह Pointer को सपोर्ट करती है ।
  5. यह एक General Purpose Language है, अर्थात इसका प्रयोग  Mathematical, Scientific, Business तथा System Software Application को बनाने के लिए किया जा सकता है ।
  6. सी भाषा में Data Structure बहुत ही लचीला होता है ।
  7. इसमें Data Operator का बहुत ही मजबूत Instruction Set होता है ।
  8. यह dynamic memory allocation को Support करती है, जिसका अर्थ है कि आप इसमें Run time पर memory allocate कर सकती है।
  9. सी लैंग्वेज का प्रयोग करके Application Program तथा System Program को सरलता पूर्वक बनाया जा सकता है 
  10. सी भाषा का compiler अन्य भाषाओं के compiler की तुलना में बहुत तेजी से प्रोग्राम को मशीन कोड में compile करता है। यह 1 या 2 सेकंड में लगभग 1000 line compile कर सकता है। इसका एक और लाभ यह है कि, सी कंपाइलर fast execution  के लिए code को optimize भी करता है।

सी भाषा के नुकसान Disadvantage of C language

  1. यह OOPs को support नहीं करती है ।
  2. इसमें Program को Run Time में Check करने की सुविधा नहीं है ।
  3. इसमें  Exception Handling का अभाव है ।
  4. यह namespace का Concept नहीं है।
  5. C भाषा मे Constructor तथा Destructors का Concept नही होता है।
  6. C प्रोग्रामिंग भाषा डेटा सुरक्षा (Data Security) प्रदान नहीं करती है।

Character Set or Alphabet of ‘C’
जिस प्रकार अंग्रेजी भाषा की वर्णमाला में A से Z तक के वर्ण होते हैं ठीक उसी प्रकार C Language के भी अपने ही वर्ण है, इसलिए C Language को सीखने के लिए हमें सबसे पहले C भाषा की वर्णमाला (Alphabet) को सीखना आवश्यक है।
 सी भाषा की वर्णमाला में A से Z तथा a से z तक अक्षर तथा 0 से 9 तक अंक और रिक्त स्थान (Space) भी सम्मिलित है इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के संकेत भी वर्णों के रूप में उपलब्ध हैं जिन्हें नीचे दर्शाया गया है- 


C भाषा में प्रयोग होने वाले विभिन्न संकेत-चिन्ह
C भाषा में प्रयोग होने वाले विभिन्न संकेत-चिन्ह

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